नशे में धुत बेटे कपिल ने अपनी ही माँ सावित्री देवी का गला घोंटने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाया। जैसे ही उनकी मौत हुई, उसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं.
- आरोपी ने उस रात चाय भी पी
Muradabad News : मुरादाबाद के उमरी सब्ज़ीपुर गाँव में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना हुई। नशे में धुत बेटे कपिल ने अपनी ही माँ सावित्री देवी ( Mother murder ) का गला घोंटने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाया। जैसे ही उनकी मौत हुई, उसने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं: उसने शांति से चाय बनाई, पी और पूरी रात लाश के पास बैठा रहा।
घर में शराब की खाली बोतल मिली
शक है कि हत्या के बाद भी आरोपी शराब पीता रहा। शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे वारदात को अंजाम देने के बाद कपिल ने आस-पड़ोस में किसी को नहीं बताया। वह देर दोपहर तक कई लोगों से फ़ोन पर बात करता रहा, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
उसने फ़ोन पर मनगढ़ंत कहानी बनाई, जिसमें कहा कि उसकी माँ सीढ़ियों से गिर गई है। आधी रात के करीब, कपिल ने Prayagraj में रहने वाली अपनी बहन रोशनी को फ़ोन किया और एक कहानी बनाई: "माँ सीढ़ियों से फिसलकर गिर गईं।" उसने शनिवार सुबह अपनी पत्नी को भी यही कहानी सुनाई। लेकिन सच इससे कहीं ज़्यादा डरावना था।
मौत की वजह ज़मीन थी
पुलिस जांच में पता चला कि कपिल एक महीने से अपनी माँ पर ज़मीन बेचने का दबाव बना रहा था। उसके पिता ऋषिपाल की मौत के बाद, ज़मीन के सात प्लॉट सावित्री देवी के नाम पर थे। कपिल को शक था कि उसकी माँ ज़मीन किसी और को दान करना चाहती है। शुक्रवार दोपहर, जब वह नशे में घर लौटा, तो उसने अपनी माँ को फ़ोन पर बात करते हुए पाया। उसने उन पर इल्ज़ाम लगाया और उन्हें बेइज्ज़त किया, और बहस इतनी बढ़ गई कि उसने उनका गला घोंटकर हत्या कर दी।
16 घंटे तक किसी को इस मर्डर के बारे में पता नहीं चला
आरोपी ने कबूल किया कि मर्डर के करीब एक घंटे बाद, उसने चाय बनाई, बॉडी को बेडरूम से बालकनी में ले गया, और वहीं रहा, कभी बैठता, कभी लेटता। पूरी रात शांति में गुज़री। गांव वाले 16 घंटे तक इस बेरहमी से हुई हत्या से अनजान रहे। शनिवार सुबह जब सावित्री देवी की बहन, पत्नी और रिश्तेदार पहुंचे, तो उन्होंने उसकी गर्दन पर चोट के निशान देखे। पुलिस को बुलाया गया। कड़ी पूछताछ में कपिल ने गुनाह कबूल कर लिया और साज़िश का पर्दाफाश हो गया।
नशा, पैसा और शक
पूछताछ में यह भी पता चला कि कपिल ने अपनी मां से 500 रुपये उधार लिए थे, जो उसने शराब में उड़ा दिए। शुक्रवार को उसने फिर पैसे मांगे और जब उसकी मां ने मना कर दिया, तो उसने ज़मीन का मामला उठाया। नशा, लालच और शक—तीनों ने मिलकर एक मां की जान ले ली।
अपनों के लिए खून-खराबे का सिलसिला
यह घटना अकेली नहीं है। मुरादाबाद और आस-पास के इलाके में लालच और भरोसे ने रिश्तों को खून से रंग दिया है—कहीं इंश्योरेंस के पैसे के लिए बेटे की हत्या हो जाती है; कहीं पैसे न मिलने पर दादी या चाची की हत्या हो जाती है; कहीं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की साज़िश में पति की हत्या हो जाती है। सवाल यह है कि क्या रिश्तों की कीमत ज़मीन, पैसे और ड्रग्स से कम हो गई है?
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